Tuesday, 16 April 2013

Shayari in Hindi - Page 4

दूरियाँ बढ़ाने को जब दिल मचलने लगे,
किसी और का साथ रास आने लगे,
तन्हाई में ठहर कर तलाशना मुझे,
जब भी हर ओर अँधेरा सा छाने लगे.

Dard Shayari - Page 3

आरजू-ऐ-सफर का जब हमने इरादा किया,
साथ चलने का उसने वादा किया,
कुछ उसको रास ना आई वफा की बातें,
कुछ ऐतबार हमनें भी ज्यादा किया…

Hindi Shayari - Page 2

तेरी इस दुनियां में ऐसा मंजर क्यों है ?
कही जखम तो कहीं पीठ पर खंजर क्यों है?
सुना है कि तू हर जर्रे-जर्रे में रहता है..
तो फिर जमी पर कहीं मस्जिद और मन्दिर क्यों है?
जब रहने वाले इस दुनियां के है तेरे ही बन्दे..
तो फिर कोई किसी का दोस्त और कोई दुश्मन क्यों है?
तू ही लिखता है जब सवका मुकद्दर…
तो कोई बदनसीब और कोई मुकद्दर का सिकंदर क्यों है?

Dard Shayari - Page 1

इतनी आसानी से कैसे भुल जाता है कोई,
रह-रह कर क्यों याद आता है कोई,
उमर भर याद करता रहेंगे आपको,
देखते है कब तक हमें भुलाता है कोई..