Monday, 22 September 2014

जनमत

वोट कुछ हिन्दू मुसलमां हो गये
जो बचे वो लोग इन्सां हो गये

सरफिरे लोगों ने बांटा दो जहां
लोग अपने घर में मेहमां हो गये

चंद सिक्कों मे बिकी इंसानियत
वो गरीबों पर मेहरबां हो गये

हाल अपना पूछने आये हैं वो
जाने कितने हमपे एहसां हो गये

कैसा जनमत,डर का साया चारसू
लोग चुन चुन के परेशां हो गये

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