Sunday, 24 January 2016

हिंदी में दो लाइन शायरी

चाँद का क्या…


चाँद का क्या कसूर अगर रात बेवफा निकली,
कुछ पल ठहरी और फिर चल निकली,
उन से क्या कहे वो तो सच्चे थे,
शायद हमारी तकदीर ही हमसे खफा निकली |

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